क्या यह पाप है ?
मंजिल को पाना हे, कुछ वक्त देना हे मेरी जिंदगी !! मेरे सपने , लोगों की क्या पर्वा हे!! ये दोस्त मेरे , वो तो किसीको पैरों तले , किसीको दिमाग से , कूचल ने की कोशिशं मे लगे रहते हे ! ना होने देंगे कामयाब इन निच दिमाग वालो को मंजिल को पाना हे कुछ थोडा सा वक्त देना हे! ! समय हे जो बाहे फैला कर खडा हे तु भी दोस्त मेरे , वक्त तौहफा दे ही दे और हलका होजा एक गूब्बारे की तरह ; क्युकी तुझे रिटर्न गिफ्ट तो देने वाला हें !! सपना वो जिंदगी का तूने जो आँखों में सजाया हें , मंजिल को पाना हें , कुछ वक्त देना हें !!