हे गुरुदेव..!! 🙏
तेरे इत्र को छू लिया है अब,
प्यास भी लगे तो पी जाऊं उस गंध को
मेरी सांसो ने सिखाया है मुझे, थम कर चलने का तरीका..
मानो कोई शक्ति का वास हो.. इस माथे के बिंदु पर..!
कोई तरंग है जो बुला रही है.. मेरे ही जीव को जीना सिखाने के लिए,
हंसने और खेलने के लिए..
तेरी रोशनी के परे जो दुनिया दिखाई है तूने..
मन लगता है वहां, मन भर आता है वहां !
ना चलते गर इस राह पर.. तो कुछ रह जाता
तेरा प्यार रह जाता,
प्यार का इक़रार रह जाता,
तेरे साथ होने का एहसास रह जाता,
हे गुरुदेव! तेरे साथ जीना रह जाता..!!
ये नहीं हो सकता...
मुस्कान के बिना इठलाना
जमीन के बिना पर्वत
गर्भ के बिना जन्म
आकाश के बिना विशालता
जल के बिना प्यास
बल के बिना साहस
अश्रु के बिना खुशी
अग्नि के बिना एकता
ह्रदय के बिना प्रेम
जीव के बिना जिंदगी
ज्ञान के बिना कृतज्ञता
गुरु के बिना हम
हमारे बिना..?? कुछ नहीं..
कुछ भी नहीं...!!





















































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